एक माह अब होने को आया,
नए बंधन पर लिखने का हमें विचार आया,
जिस बंधन ने दिया जीवन को हमसाया,
और बड़ों के शुभाशीषों की छत्रछाया|
"आखिर हो ही गयी हमारी भी शादी,
कहती है जिसे आधी आबादी,
खुशहाली, और आधी, बर्बादी,
हो रहे अब हम भी जीवन के इस दौर के आदि|
औरों की तरह हम भी घूम आये सुदूर वादी,
बदले कुछ हम, छोड़ झोला और खादी,
बदले कुछ वो भी, बन चुलबुल कन्या से नारी सादी,
कदाचित सामंजस्य के गुण के कारण ही कहते हैं, इस बंधन को, अनादि|
पूछे लोगों से अनुभव इस दौर के,
बाँटे कुछ ने, बाकी खिसके दौड़ के,
जो कुछ भी अनुभव उन्होंने बाँटे,
हमने कुछ निम्नोक्त, उनमें से, कविता में पिरोने के लिए छाँटे|
'शादी एक खट्टा-मीठा एहसास है,
अपने जोड़ीदार को जानने का एक मंद-मंद प्रयास है,
नए नातों से सज्जित जीवन भर का उपहार और सत्कार है,
जगाती ह्रदय में गुदगुदी और अन्तःमन में संगीतात्मक झंकार है|'
कोई कहे, है ये सामंजस्य का, तो कोई भाग्य का खेल,
तो कोई, मेल है ये दो व्यक्तित्वों का चाहे आचार-विचार हो उनके बेमेल,
कोई कहे, है ये बंधन पवित्र, तो कोई कहे है ये बिन जमानत की जेल,
तो कोई, ये है अनूठे भावों, घटनाओं, उतार-चढ़ावों से बनी चटपटी खट्टी-मीठी भेल|' "
नए बंधन पर लिखने का हमें विचार आया,
जिस बंधन ने दिया जीवन को हमसाया,
और बड़ों के शुभाशीषों की छत्रछाया|
"आखिर हो ही गयी हमारी भी शादी,
कहती है जिसे आधी आबादी,
खुशहाली, और आधी, बर्बादी,
हो रहे अब हम भी जीवन के इस दौर के आदि|
औरों की तरह हम भी घूम आये सुदूर वादी,
बदले कुछ हम, छोड़ झोला और खादी,
बदले कुछ वो भी, बन चुलबुल कन्या से नारी सादी,
कदाचित सामंजस्य के गुण के कारण ही कहते हैं, इस बंधन को, अनादि|
पूछे लोगों से अनुभव इस दौर के,
बाँटे कुछ ने, बाकी खिसके दौड़ के,
जो कुछ भी अनुभव उन्होंने बाँटे,
हमने कुछ निम्नोक्त, उनमें से, कविता में पिरोने के लिए छाँटे|
'शादी एक खट्टा-मीठा एहसास है,
अपने जोड़ीदार को जानने का एक मंद-मंद प्रयास है,
नए नातों से सज्जित जीवन भर का उपहार और सत्कार है,
जगाती ह्रदय में गुदगुदी और अन्तःमन में संगीतात्मक झंकार है|'
कोई कहे, है ये सामंजस्य का, तो कोई भाग्य का खेल,
तो कोई, मेल है ये दो व्यक्तित्वों का चाहे आचार-विचार हो उनके बेमेल,
कोई कहे, है ये बंधन पवित्र, तो कोई कहे है ये बिन जमानत की जेल,
तो कोई, ये है अनूठे भावों, घटनाओं, उतार-चढ़ावों से बनी चटपटी खट्टी-मीठी भेल|' "