जीवन क्या है?
अनन्त संघर्ष यात्रा या सुख चूरन की मात्रा ?
प्रश्नोत्तर विशाल, या 'आस और नैराश्य' का महीन जाल ?
आसक्ति है या वैराग्य, कर्म है या भाग्य !
भूत है या वर्तमान, सतत है या स्थिर !
इच्छा है या संतुष्टि, बंधन है या मुक्ति !
हताशा है या उत्साह, लाचारी है या कर्म-उत्कंठा !
अभीष्ट है, समाधान है या शंका !
शुष्क है या तर, संगठित है या है तितर-बितर!
कभी विनती है, तो कभी निर्देश,कभी समक्ष है तो कभी दृष्टान्त;
कभी आक्रांत - विक्रांत, तो कभी असीम शांत जैसे शेष शैया पर निद्रित लक्ष्मीकान्त ।
कभी चिंतन है, कभी निंदा कभी दर्शन,
कभी अवसाद, कभी हर्ष कभी अनावश्यक प्रदर्शन ।
कभी विस्तृत कभी संकीर्ण, कभी तेजपूर्ण कभी जीर्ण,
कभी तीव्र कभी क्षीण, कभी सपन्न कभी दीन ।
उत्साह की छटा, आनंद की घटा, कभी प्रगति की लता ।
अपार जिरह है, कभी सहमति-विरोध है ।
समर्पण है, मान है कभी, तो कभी अर्पण,
कभी पारभासी, कभी दर्पण ।
है जीवन भानुमति का पिटारा,
कभी पतन का रसातल, तो कभी उत्कर्ष का ध्रुव तारा ।
विवेचना बहुत अब कर ली,
फिर भी मन में जिज्ञासा और ही है भàर ली,
जैसे हर दिन हो कक्षा पहली
फिर भी जीवन है एक अबूझ पहेली।