न दशा है, न दिशा है, यही इनकी व्यथा है,
भीख मांगना ही जैसे इनकी प्रथा है |
कब तक चलेगी यही गाथा,
देखकर इन्हें भर जाता है, लकीरों से ये माथा |न है कोई करने को इनकी रक्षा,
इन्हीं के माता-पिता ने इन्हें नहीं बक्शा |
न मिली है, इन्हें कोई शिक्षा,
न मिली है, इन्हें कोई शिक्षा,
बस पैसे कमाने के लिए मांग रहे हैं, जबरन ये भिक्षा |
चेहरों पर इनके दिखती है, एक आशा,
अपशब्द और गलियाँ हैं, इनकी भाषा |
न जाने ये ख़ुशी की परिभाषा,
पर बेचकर खिलौने-गुब्बारे करते पूरी दूसरों की अभिलाषा |
ढेरों जूते हैं, पास में पर चमकाने को.
देखों तो नहीं है, एक जोड़ी भी नाजुक-कोमल पैर बचाने को |
नाम अगर हो भी तो इनका नाम पुकारने वाला कोई मुख नहीं ,
दुःख ही दुःख हैं, इनके लिए रत्ती भर का सुख नहीं |
भाग्य के नाम पर मिलती है दुत्कार,
खाने के नाम पर फिका हुआ खाना और लोगों की फटकार |
नहीं हैं ढंग के कपडे ढकने को तन,
नए कपड़ों के स्थान पर करते हैं, उतरन से ही संतुष्ट मन |
धूप में लू के थपेड़ो को हैं ये सहते,
न जाने बरसात के दिनों में कैसे हैं ये रहते !
ठण्ड में ठिठुरने के अलावा कोई चारा नहीं,
इनसे ज्यादा कोई बेचारा नहीं |
घर के नाम पर बस है, "तीन गुणा तीन" का साया,
इसी में इनका पूरा परिवार नींद में समाया |
साथी हैं इनके जुआं और सट्टा,
देश के भविष्य को लग रहा है बट्टा |
Chocolates इन्हें भी भाती हैं,
मिठाई देख के इनकी भी जीभ ललचाती है |
बचपन तो इनका धरती पर आते ही जैसे खो गया,
स्नेह के अकाल में इनका बचपन पूरा गुजर गया |
सरकारें आती हैं, जाती हैं,
इनके लिए योजनायें बनाती ही रह जाती हैं |
सरकारों से उम्मीदें रखना है बेमानी,
बदलाव के लिए जरुरी है, जागृति फैलानी |
इनको भी बचपन जीने दो,
और भविष्य के सपने सीने दो |
मन में इनके भी लेती हैं, इच्छाएं आकार,
इनको भी करने दो सपने साकार |
Gr88888888888888888!!!!
जवाब देंहटाएं:) hee ta tumhin aikali hotee Punyaat astana.
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