प्रकाश बिन मेरा अस्तिव है कल्पना से परे, और है शून्य,
किन्तु तुम्हारे प्रकृति में विलय तक, आयु मेरी भी है अक्षुण्य |
प्रकाश है मेरा जन्मदाता, और तुम मेरे आधार,
घटते प्रकाश के साथ हो जाये जीवन मेरा जार-जार |
दिशा-दशा-आकार-विस्तार-घनत्व, स्वयं का मेरा कुछ नहीं होता,
कभी मेरा अस्तित्व तुम्हारे दायें, तो कभी बायें में है होता |
कभी तुम्हारे चलती पीछे, तो कभी हूँ चलती आगे,
चलती हूँ साथ निरंतर तब भी, जब तुम दौड़े-भागे |
कई भौगोलिक घटनायें हैं, मेरा ही प्रभाव,
मुझसे ही अस्तित्व में हैं आते, चन्द्रमा के सोलह भाव |
चन्द्र-सूर्य पर लगते हैं, मेरे कारण ही अस्थायी घाव,
मेरे सानिध्य में मिलती राहत, जब ग्रीष्म में चढ़ जाता सूरज का ताव |
वैसे तो मेरा रूप नहीं, और रंग है काला,
पर जब देखो तुम जल में खुद को लेती मैं, तुमसा रूप निराला |
जान गये होगे अब तक, मैं हूँ छाया,
रहूंगी साथ तुम्हारे तब तक, जब तक है तुम्हारे पास ये काया |
**************** परछाई *******************
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